Chapter 1 : Samadhi Pada
|| 1.1 ||

अथ योगानुशासनम् 


पदच्छेद: अथ , योग , अनुशासनम् ॥


शब्दार्थ / Word Meaning

  • अथ - अब
  • योग - योग (की)
  • अनुशासन - पहले से विद्यमान शिक्षा (आरम्भ करते हैं) ।

सूत्रार्थ / Sutra Meaning

Hindi: अब योग के अनुशासन को प्रारंभ करते हैं ।

Sanskrit: अधुना योगस्य अनुशासनम् आरभामः।

English: Now let's start the discipline of yog.

French: Maintenant le yoga est expliqué.

German: Jetzt folgt die Erklärung des Yoga.

Audio

Yog Sutra 1.1
Explanation 1.1

Explanation/Sutr Vyakhya

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  • Yog Kavya

वैदिक ग्रंथों में अथ शब्द दो अर्थों में प्रयुक्त होता है। प्रथम मंगलाचरण के लिए और दूसरा ग्रंथ में प्रवेश से पूर्व किये गए साधन चतुष्ट्य के लिये।

जब साधक, साधन चतुष्ट्य की साधना कर चुका होता है या कर रहा होता है अर्थात ग्रंथ को समझने के लिए आवश्यक प्रवृत्ति विशेष धारण कर चुका होता है ‘तब’ सूत्र कहता है कि ‘अब’ योग के अनुशासन को प्रारम्भ करते हैं। सामान्य बोलचाल की भाषा में जब भी हम ‘अब’ शब्द का प्रयोग करते हैं तो उसका सीधा अर्थ होता है “अभी तक ऐसा हो चुका है अब आगे से नहीं करना ” अथवा “कुछ विशेष तैयारियां हो चुकी हैं अब हम आगे बढ़ते हैं” “अब हम चलते हैं”; “मैंने गलती की है, अब आगे से नहीं करूंगा” आदि आदि । इस प्रकार के प्रयोग हम रोजमर्रा जी जिंदगी में करते रहते हैं। अतः यह स्पष्ट है कि महर्षि पतंजलि योग में प्रवेश से पूर्व कुछ साधना विशेष की बात कर रहे हैं या कुछ निर्देश विशेष की बात हो चुकी है औऱ अब जबकि सब मानसिक एवं  सैद्धान्तिक रूप से तैयार हैं तो योग के अनुशासन को प्रारम्भ किया जा सकता है।

भौतिक जगत (सांसारिक जीवन में) में भी देखा जाता है कि यदि आप किसी विषय में स्नातक (ग्रेजुएट) होना चाहते हैं तो आपके पास पूर्व में 12 वीं की डिग्री होनी चाहिए तभी आप स्नातक (ग्रेजुएशन) में प्रवेश पाने के अधिकारी हो सकते हैं। केवल आप प्रवेश के अधिकारी ही नहीं अपितु अब आपको संबंधित सभी विषयों को पढ़ाया और समझाया जा सकता है। ऐसे ही योग भी जीवन के कालक्रम में प्रवेश की एक प्रक्रिया है और इसमें प्रवेश वे ही कर पाएंगे जो योग्यता रखते हों। आम बोलचाल की भाषा में कहें तो योग में एडमिशन लेने के लिए जिस आधारभूत क्वालिफिकेशन की जरूरत है, वो आपके पास अवश्य हो। अतः प्रश्न उठता है कि  योग के अनुशासन में प्रवेश करने की योग्यता क्या है? कैसे हम समझें कि अब हम योग के योग्य हो चुके हैं?

जब आप सब प्रकार से बाहरी एवं सांसारिक उपायों से निराश हो चुके होते हैं, जब आपका चित्त या मन सचमुच में अपने भीतर के साम्राज्य में प्रवेश पाने को आतुर होने लग जाता है, जब आप अपने दोषों से भली भांति परिचित होने लगते हैं और उन्हें अपने जीवन से पूरी तरह हटा देने की तीव्र अभीप्सा से भरने लग जाते हैं, जब आपके भीतर राग,द्वेष, काम,क्रोध, लोभ और मोह, ईर्ष्या और छल कपट आदि समस्त दोषों – दुर्गुणों से मुक्त होने की तीव्र इच्छा जगने लग जाती है तब जीवन में योग में प्रवेश करने का संयोग बनने लग जाता है। वही समय है जब आप अपने जीवन में अनुशासन को ला सकते हैं और सच्चे अर्थों में जीवन को अनुशासन में ला सकते हैं। जिनके मन में इस प्रकार के भाव और संवेदनाएं स्वयं के जीवन को लेकर उत्पन्न होने लग गए हों, ऐसे व्यक्तियों के लिए महर्षि पतंजलि कहते हैं कि “अब” जब तुम्हारे मन में इस प्रकार की तीव्र इच्छा जन्म ले चुकी है   “तब” योग के अनुशासन को आओ प्रारम्भ करते हैं।

In Vedic Granths‘atha’ (now) word has two different connotations. The first is for good/auspicious commencement of the subject and the second signals the value of what you’re about to venture into.

After the student/novice has equipped himself with four means of salvation e.i. he has equipped himself with specific skill to understand the grantha then that is the beginning of Yoga discipline. According to Sutra ‘let us now begin the practice of Yoga’. Colloquially the use of the word ‘now’ directly means that so far it has happened but now it will not be done meaning thereby that some essential preparation has been done to move ahead. Let us now move forward. “I have made a mistake but now it will not be repeated”. It is clear that in Maharshi Patanjali Yoga there is a mention of a special sadhana or specific instructions before entering it and according to Maharshi you can start the Yoga discipline only when you are mentally and theoretically ready.

In the material world also it is mandatory to have cleared class XII to be eligible for admission in graduation course. Not only eligible to get admission but you can be taught and made to understand. Likewise Yoga is eligibility for admission to lifetime activity and only those who have the ability will be admitted. Now what ability is required to enter the Yoga discipline? When you are hopeless after trying all external methods, your mind is eager to find the kingdom (soul) of your heart, you are well aware of your drawbacks and you are longing to get rid of them, have a strong desire to be free from affection, spite, hatred, jealousy, lust, anger, greed only such a man can get entry to Yoga or to practice Yoga discipline. For such a man Maharshi Patanjali has said, “Now when you have a mind like this, then let us begin the practice of Yoga discipline.”

coming soon..
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सूत्र: अथ योगानुशासनम्

 

योग विषयक ज्ञान का आओ आरम्भ ‘अब’ करते हैं

“अथ योगनुशासनम्” इस सूत्र से चरण प्रथम धरते हैं ।

36 thoughts on “1.1”

  1. Antim arya says:

    We all are thankfull to pujay swami videh devaji mhara for to provide us these divine sutra in hindi english & with brief narration in “voice audio” also. Audio voice is so good & clear that anyone who is unable to read or have weakness in reading with understanding can understand by listening these audios. Such a great effort by “pujay shree” once again thanks.

  2. Kailash Sati says:

    om Swami ji Great effort & Congratulation. Hope this effort will teach us a lot.

  3. Antim arya says:

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    1. Swami Videh Dev says:

      Patanjali Yog Sutras are being translated into multiple languages worldwide that would help humanity to understand its deep meaning.
      an interactive dialogue between Guru and disciple will soon be part of this Vedic project.

      1. Satya Prakash says:

        Thanks pujya swami ji

      2. Neeraj Dahiya says:

        Thanks Swamiji for your guidance !

        We would like to know more about Maharishi Patanjali, an article on the maharishi ji will great help!

  4. Neeraj Giri says:

    ओइम्, इस सूत्र में योग में प्रवेश के संदर्भ में बताया गया है । जिससे पता चलता है कि हम अब हम योग के लिए तैयार हैं और अब हम योग में प्रवेश कर सकते हैं

  5. Anuj Kumar says:

    This is a great place and opportunity to learn and understand Patanjali Yog Sutra in a very deep way even it is written in a very understandable and simple way. Audio option provided make us to pronounciate sutra correctly. A lot of thanks for all this.

  6. Anuj kumar says:

    अहंकार,लोभ,क्रोध,मोह और माया यह पांच ऐसे तत्व है जिनके मुक्त हो जाने से जीवन को जीने की राह मिल और इस परम दिव्य शक्ति को जाने की ईच्छा बन जाती है

  7. Satyarthi says:

    देवादिदेव महादेव जी महायोगी महाज्ञानी हैं । उनहोंने योग अभ्यास करते हुए समग्र सृष्टि को अभय प्रदान किए हैं। वही योग सप्त ऋषि से होकर महर्षि पतंजलि द्वारा सूत्र के रुप में जनमानस के लिए कल्याणकारी, ज्ञान विज्ञान परिष्कृत करने वाला हैं । अब आपने सहजता के साथ सधारन जीवन के लिए अमृत रस प्रदान किये हैं । इस सुंदर प्रयास को नमन वंदन और अभिनंदन।

  8. कैलाश जी says:

    योग दर्शन के सूत्रों को शुध्द व स्पष्ट स्वरो मे तथा अलग अलग भाषाओं के माध्यम से पूरा विश्व भारतीय संस्कृति का दर्शन कर वेद अध्यात्म मार्ग पर चले ऐसे अद्वितीय पहल आप पूज्य स्वामी जी के व्दारा किया जा रहा है तथा इस ज्ञान गंगा की लाभ हमे भी मिल रहा है इसके लिए आप पूज्य श्री स्वामी जी सादर धन्यवाद व नमन।
    इस सूत्र को सरल शब्दों में समझे तो अपने समस्त इन्द्रियों को संयम में रखना, अनुशासित रखना ही योग की प्रारंभिक अवस्था है।

    1. admin says:

      आप सब के सहयोग के बिना और शुभ भावनाओ के बिना यह कार्य अधूरा है। इसकी पूर्णता पाठकों की सहभागिता में है अतः आप सबके सुझाव समय समय पर हमें मिलते रहेंगे और नए पाठक जुड़ते रहेंगे तो हमारा यह प्रयास फलदायी होगा

  9. रज्जन कान्त says:

    ओ३म्
    अपने जीवन में स्वाध्याय एवं योग को घटित करने की सहज सरल यथार्थ कक्षा की व्यवस्था पूज्य श्री आपने की है पूज्य स्वामी जी आपके और सहयोगी टीम के पुरुषार्थ को हृदय से नमन् वंदन
    योग में प्रवेश हेतु योग्यताओं की आवश्यकता होती है योग्यताओं को विकसित एवं अर्जित करने के लिए शारीरिक मानसिक आध्यात्मिक सैद्धांतिक व्यवहारिक संतुलन ही नहीं अपितु जीवन के प्रत्येक पहलू में संतुलन की आवश्यकता होती है संतुलित जीवन के उपरांत साधक की दोषो से दूर होने की तीव्र इच्छा शक्ति जागृत होती है आतुर होता है योग में और योग के अनुशासन में प्रवेश हेतु।

  10. Baishnab Bagh says:

    बहुत-बहुत धन्यवाद स्वामी जी ओम प्रणाम।

  11. रामपुकार says:

  12. Vidhyashankar says:

    Mughe aor gyan. Prapt karna hae
    Samy samy par jankari dete rhe jisse
    Aage ki kary bar sake.

  13. Gautam Yp Nagaon Assam says:

    I don’t understand meaning of yog Sutra,, now Swamiji explain writing &voice mail its very helpful for us, now sutras are memories easily.

  14. Deepak Pathak says:

    ॐ स्वामी जी सादर नमन ,स्वध्याय बिल्कुल जीवन के लिए वैसे ही जरूरी है जैसे जीने के लिए ,भोजन ,जल और वायु।

  15. easwar rao says:

    Very well friendly, systamaticly, simply structured designed, with voices n text explainations. Pranaam to Swamiji and Team.🙏 Wish to subscribe to this site.

    1. admin says:

      Easwar ji, thank you for your kind words. Audience like you are strength..Pujya swami ji is blessing us with their thoughtful commentary.

  16. Ram Sanjeevan says:

    swami ji, yeh gyan hum sab sadharan manusya ke liye aprit hey, OM.

  17. Ashok Arya says:

    Very very thank full to swami videh devji Maharaj and Adaraneey Neeraj ji for This Excellent opportunity

  18. Ashok Arya says:

    बहुत सुंदर धन्यवाद् पूज्य स्वामीजी

  19. Anjali says:

    DHANYAWAD SWAMI JI

  20. मुकेश आर्य कानड़ जिला आगर मध्य प्रदेश says:

    पूज्य स्वामी जी सादर चरण स्पर्श परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज वर्तमान युग में एक अवतारी की भूमिका में है और आप जैसे सन्यासी वृंद उनके हनुमान अंगद नल नील आदि की भूमिका में है चाहे दुनिया वर्तमान काल में घटित हो रही बड़ी बड़ी घटनाओं को भूल जाए किंतु आपके पुरुषार्थ को इतिहास में स्वर्णाक्षर में अंकित करके रखा जाएगा

    1. आभार मुकेश जी

  21. Dipak sawai says:

    ओम स्वामी जी प्रणाम

  22. Sumanta Kumar Giri says:

    परम पूज्य स्वामी जी को कोटि प्रणाम.
    ओम🙏

  23. रश्मि says:


    स्वामीजी प्रणाम। महर्षि पतंजलि प्रणित योगदर्शन की सरल व्याख्या से सभी लाभान्वित होंगे। एक समय ऐसा था कि योगदर्शन मुझे ठीक से समजमें ही नहीं आता था, पर अब योग के विविध विषयों में मेरा सबसे पसंदगी का विषय हैं। कल मैंने पतंजलि के मुंबई प्रान्त के विविध जिलों में यह लिंक भेजी हैं। हम योगदर्शन की प्रतियोगिता भी आयोजित करनेवाले हैं।

    1. admin says:

      धन्यवाद रश्मि जी, बहुत सुन्दर प्रयास

  24. Kusum says:

    Thank so much it help me alot in my study such great website 🙏🙏🙏

    1. admin says:

      thanks kusum ji, please continue to support us

  25. avdheshram says:

    Omji

  26. Ram Kushwaha says:

    Very well structured site swamiji, great effort by your team. This benefits all to understand the sutra’s in Hindi & English.
    🙏

  27. sanjay says:

    Your article tackles a complex topic with clarity and simplicity. If you’re hungry for more simplified explanations, click here for beginner-friendly resources.

  28. Anshu says:

    इसमें लिखा है की जब बाहर की सब चीजों से परेशान हो जाते है और भीतर के स्मराजय को जानने को आतुर होते हैं तब योग स्टार्ट करते है
    तो फिर जिन्होंने अभी तक बाहर का इतना सब देखा ही नहीं फिर भी वो अपने आप को या आत्मा को जानना चाहता है तो क्या उसके लिए योग नही है , मतलब पहले बाहर की चीज़ों से परेशान होना पड़ेगा ?

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